एक नयी माँ के लिए सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि क्या उसके बच्चे का पेट भर रहा है? ब्रेस्ट मिल्क यानी माँ का दूध बच्चे के लिए "पहला टीका" (First Vaccine) होता है, जो उसे बीमारियों से लड़ने की शक्ति देता है।
लेकिन कई बार स्ट्रेस, थकान, या गलत खान-पान की वजह से दूध की सप्लाई कम हो जाती है। अगर आप भी इस परेशानी से गुज़र रही हैं, तो घबराइए मत। नीचे दिए गए तरीके आपकी मदद करेंगे:
Maa ka doodh badhane ke tarike |
1. खान-पान में करें ये बदलाव (Dietary Tips)
ब्रेस्टफीडिंग के दौरान माँ की डाइट का सीधा असर दूध की क्वालिटी और क्वांटिटी दोनों पर पड़ता है। अगर आप मिल्क सप्लाई बढ़ाना चाहती हैं, तो अपने रोज़ाना के खान-पान में नीचे दिए गए बदलाव ज़रूर करें:
-
प्रोटीन और कैल्शियम का सही मेल: प्रोटीन शरीर की मरम्मत करता है और कैल्शियम हड्डियों को मज़बूत बनाता है।
- दूध और दही: दिन में कम से कम 2-3 बार डेयरी प्रोडक्ट्स लें। दूध में थोड़ा शतावरी पाउडर मिलाकर पीना काफी असरदार होता है।
- पनीर और दालें: अरहर, मूंग और मसूर की दाल को अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं। इनमें मौजूद प्रोटीन एनर्जी देता है।
- अंडे: अगर आप मांसाहारी हैं, तो अंडे प्रोटीन और विटामिन D का बेहतरीन ज़रिया हैं।
-
सब्जियों का चुनाव: कुछ खास सब्जियां 'लैक्टोजेनिक' होती हैं:
- लौकी और तोरी: ये हज़म करने में आसान होती हैं और शरीर को हाइड्रेट रखती हैं।
- हरी पत्तेदार सब्जियां: पालक, मेथी और बथुआ में आयरन और फोलिक एसिड होता है।
- गाजर और चुकंदर: इनमें विटामिन A और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो इम्युनिटी बढ़ाते हैं।
-
सुपरफूड्स और मसाले:
- गोंद के लड्डू: यह माँ को ताकत देते हैं और मिल्क सप्लाई बढ़ाते हैं।
- सूखे मेवे: बादाम, अखरोट और काजू को भिगोकर खाएं।
- अजवाइन का पानी: खाने के बाद अजवाइन का पानी पीने से पाचन सही रहता है और गैस की समस्या नहीं होती।
इन चीज़ों से परहेज़ करें: ज़्यादा कैफीन (चाय/कॉफी), तीखा-मसालेदार खाना और कच्ची सब्जियों से बचें ताकि बच्चे को गैस या पेट दर्द न हो।
2. हाइड्रेशन: पानी है सबसे ज़रूरी
माँ का दूध लगभग 85% से 90% पानी से बना होता है।
- कितना पानी पिएं? दिन भर में 10 से 12 गिलास पानी पिएं। नियम बनाएं कि हर फीड से पहले और बाद में एक गिलास पानी ज़रूर पिएं।
- अन्य विकल्प: नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ और ताज़ा फलों का रस भी ले सकते हैं।
- संकेत: अगर पेशाब गहरा पीला है या होंठ सूख रहे हैं, तो समझ लें कि शरीर में पानी की कमी है।
3. "Demand and Supply" का नियम समझें
जितनी ज़्यादा बच्चे की डिमांड होगी, शरीर उतना ही ज़्यादा दूध बनाएगा।
- बार-बार फीड कराएं: दिन में 8 से 12 बार फीड दें। बच्चे के रोने का इंतज़ार न करें।
- ब्रेस्ट खाली करें: यदि बच्चा कम पी रहा है, तो ब्रेस्ट पंप से दूध निकाल दें ताकि शरीर को नया दूध बनाने का सिग्नल मिले।
- नाइट फीडिंग: रात में प्रोलैक्टिन (Prolactin) हार्मोन का लेवल हाई होता है, जिससे सप्लाई बढ़ती है।
- इनसे बचें: फार्मूला मिल्क या पैसिफायर (चूसनी) का ज़्यादा इस्तेमाल डिमांड कम कर देता है।
4. सही 'Latch' और पोजीशन
अगर बच्चा सही से स्तन को नहीं पकड़ेगा (Latch), तो उसे पूरा दूध नहीं मिलेगा और माँ को दर्द भी होगा।
- सही लैच: बच्चा सिर्फ निप्पल नहीं, बल्कि उसके आसपास के काले हिस्से (Areola) को भी मुँह में ले।
- पोजीशन: क्रैडल होल्ड (Cradle Hold), फुटबॉल होल्ड या लेटकर (Side-lying) फीड कराना, जो भी आपको आरामदायक लगे।
- पहचान: बच्चा दूध निगलने की आवाज़ करे और आपको तेज़ दर्द न हो, तो लैच सही है।
5. स्ट्रेस और थकान से दूर रहें
मानसिक स्वास्थ्य का सीधा असर दूध पर पड़ता है।
- स्ट्रेस न लें: तनाव से 'कोर्टिसोल' हार्मोन बढ़ता है जो दूध को रोकता है।
- स्किन-टू-स्किन कांटेक्ट: बच्चे को अपने सीने से लगाकर रखें, इससे 'ऑक्सीटोसिन' (लव हार्मोन) निकलता है जो दूध के बहाव को तेज़ करता है।
डॉक्टर से कब मिलें?
अगर बच्चे का वज़न नहीं बढ़ रहा, वह दिन में 6 से कम बार डायपर गीला कर रहा है, या लगातार रोता रहता है, तो तुरंत डॉक्टर या लैक्टेशन कंसल्टेंट से सलाह लें।
निष्कर्ष: माँ बनना एक खूबसूरत एहसास है। सही डाइट और धैर्य के साथ आप हर मुश्किल को दूर कर सकती हैं।
